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भारत का ईवी क्रांति: बजट 2025 और बैटरी आत्मनिर्भरता की ओर

27-03-2025

ब्लॉग संरचना:
 

  1. प्रस्तावना

  2. बजट 2025: ईवी निर्माण के लिए गेम चेंजर

  3. BYD का सुपर ई-प्लेटफॉर्म और वैश्विक दौड़

  4. बैटरी की चुनौती: लागत और तकनीकी क्षमता

  5. चीन पर निर्भरता क्यों घटानी जरूरी है

  6. भारत बनाम चीन: ईवी अपनाने की तुलना

  7. भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बढ़त

  8. व्यापार कूटनीति और ईवी: भारत-अमेरिका साझेदारी

  9. कैसे भारत बैटरी वैल्यू चेन में पकड़ बना सकता है

  10. आगे का रास्ता: नीति, निवेश और नवाचार

  11. निष्कर्ष
     


🚗 भारत की ईवी क्रांति: बजट 2025 और बैटरी आत्मनिर्भरता की ओर
 

1. प्रस्तावना
 

भारत इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है जहाँ से वह स्वच्छ परिवहन की दिशा में तेज़ी से बढ़ सकता है। वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का क्रेज बढ़ रहा है, और इसी दिशा में भारत के बजट 2025 ने एक साहसिक कदम उठाया है। EV और मोबाइल बैटरियों के निर्माण में उपयोग होने वाले 63 महत्त्वपूर्ण पुर्जों पर आयात शुल्क हटाना सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं है—यह एक बुनियादी नीति बदलाव है।

 

🌐 अधिक जानें: भारत का ईवी रोडमैप: नीति, चुनौतियाँ और आगे का रास्ता - नीति आयोग की आधिकारिक रिपोर्ट।

 

2. बजट 2025: ईवी निर्माण के लिए गेम चेंजर
 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025-26 में 35 EV बैटरी कैपिटल गुड्स और 28 मोबाइल बैटरी पुर्जों पर कस्टम ड्यूटी हटाने की घोषणा की। फाइनेंस बिल 2025 ने इसे वैधानिक रूप दे दिया है। इससे एक स्पष्ट संदेश गया है—भारत क्लीन टेक रेस में बड़ा खिलाड़ी बनने को तैयार है।
 

इस फैसले से न केवल निर्माण लागत घटेगी, बल्कि घरेलू कंपनियों को बड़े स्तर पर उत्पादन करने की प्रेरणा मिलेगी। साथ ही, विदेशी निवेशक भारत को एक मैन्युफैक्चरिंग बेस के रूप में देखना शुरू करेंगे।
 

🌐 विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें: केंद्रीय बजट 2025 हाइलाइट्स - भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट।

 

3. BYD का सुपर ई-प्लेटफॉर्म और वैश्विक दौड़
 

इसी बीच, चीनी EV दिग्गज BYD ने “सुपर ई-प्लेटफॉर्म” लॉन्च किया, जो सिर्फ 5 मिनट की चार्जिंग में 500 किलोमीटर की रेंज दे सकता है। यह टेक्नोलॉजी रेंज एंग्जायटी को खत्म कर सकती है और EV को पेट्रोल-डीजल वाहनों से भी ज्यादा सुविधाजनक बना सकती है।
 

भारत को ये बात समझनी होगी: यह दौड़ वैश्विक है और इनोवेशन ही असली हथियार है। केवल नीतियाँ काफी नहीं होंगी, हमें रिसर्च और डेवलपमेंट में भी आक्रामक निवेश करना होगा।

 

🌐 जानें कि कैसे BYD का सुपर ई-प्लेटफॉर्म 3.0 5 मिनट की चार्जिंग में 500 किमी की रेंज प्रदान करता है।

 

4. बैटरी की चुनौती: लागत और तकनीकी क्षमता
 

EV की कुल लागत का लगभग 40% हिस्सा बैटरी की वजह से होता है। यह भारत जैसे निम्न और मध्यम आय वाले देशों के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि EV लंबे समय में फ्यूल पर खर्च घटाकर बचत कराते हैं, लेकिन उनकी शुरुआती कीमत आम लोगों को पीछे हटा देती है।
 

भारत की बैटरी निर्माण क्षमता फिलहाल सीमित है, जिससे चीन पर निर्भरता बनी रहती है—जो कि EV बैटरियों के वैश्विक उत्पादन में 70% से अधिक की हिस्सेदारी रखता है।

 

🌐 पढ़ें: ईवी बैटरी की लागत और भविष्य की प्रवृत्तियाँ - ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट।

 

5. चीन पर निर्भरता क्यों घटानी जरूरी है
 

लिथियम-आयरन-फॉस्फेट (LFP) बैटरियां अब ग्लोबल इंडस्ट्री स्टैंडर्ड बन चुकी हैं—ये सस्ती हैं, सुरक्षित हैं और ऊर्जा दक्षता में बेहतर हैं। लेकिन इस क्षेत्र में चीन की पकड़ बहुत मज़बूत है।
 

भारत को आत्मनिर्भर बनने के लिए बैटरी निर्माण के दोनों सिरों—अपस्ट्रीम (खनन और रिफाइनिंग) और डाउनस्ट्रीम (सेल निर्माण और असेंबली)—पर मजबूत पकड़ बनानी होगी। इससे भारत, चीन पर निर्भर देशों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बन सकता है।
 

6. भारत बनाम चीन: ईवी अपनाने की तुलना
 

2024 में चीन में 45% कार रजिस्ट्रेशन EV के रूप में हुए। जबकि भारत में यह संख्या सिर्फ 2% रही। यह अंतर दर्शाता है कि भारत को नीति, आधारभूत ढांचा और टेक्नोलॉजी इनोवेशन में बहुत तेज़ी लाने की ज़रूरत है।

 

🌐 आँकड़ों के साथ तुलना करें: भारत और चीन में ईवी बाजार की स्थिति - Statista का डेटा।

 

7. भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बढ़त
 

एक अच्छा संकेत यह है कि भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर तेजी से अपनाए जा रहे हैं। 2024 में 1.14 मिलियन यूनिट्स बिकीं, जो कुल EV बिक्री का 60% थीं। ये वाहन सस्ते, शहरी उपयोग के लिए सुविधाजनक और आसानी से चार्ज होने वाले हैं—इसलिए लोकप्रिय हैं।

यह सेगमेंट भारत में EV क्रांति का लॉन्चपैड बन सकता है।
 

8. व्यापार कूटनीति और ईवी: भारत-अमेरिका साझेदारी
 

हालांकि यह ड्यूटी छूट अमेरिका के साथ व्यापार संबंध मजबूत करने और संभावित जवाबी टैरिफ से बचने के लिए है, लेकिन इससे कहीं बड़ी रणनीति झलकती है—स्वच्छ मोबिलिटी में नेतृत्व।
 

यदि भारत खुद को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित कर पाए, तो वैश्विक EV दिग्गज निवेश के लिए भारत का रुख करेंगे।

 

🌐 जानें: भारत-अमेरिका क्लीन एनर्जी साझेदारी - अमेरिकी ऊर्जा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट।

 

9. कैसे भारत बैटरी वैल्यू चेन में पकड़ बना सकता है
 

भारत को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए ज़रूरत है:

  • स्थानीय बैटरी R&D लैब्स में निवेश

  • पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए लिथियम सोर्सिंग

  • EV टेक्नोलॉजी में स्किल डेवलपमेंट

  • बैटरी निर्माण के लिए PLI स्कीम का विस्तार

  • देशभर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण

इससे लागत घटेगी, विदेशी निवेश बढ़ेगा और EV को व्यापक स्तर पर अपनाया जाएगा।
 

10. आगे का रास्ता: नीति, निवेश और नवाचार
 

यह ड्यूटी छूट सिर्फ पहला कदम है। भारत को EV भविष्य की ओर तेजी से बढ़ाने के लिए:

  • नीति में स्थिरता सुनिश्चित करनी होगी

  • FAME III स्कीम को और आक्रामक बनाना होगा

  • बैटरी टेक स्टार्टअप्स को टैक्स में छूट देनी होगी

  • कच्चे माल तक पहुंच के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाना होगा

लक्ष्य स्पष्ट है—EV क्रांति को सिर्फ अपनाना नहीं, बल्कि लीड करना

 

🌐 जानें: FAME इंडिया योजना - ईवी को बढ़ावा देने वाली भारत सरकार की आधिकारिक योजना।

 

11. निष्कर्ष

बजट 2025 ने भारत को EV क्षेत्र में मजबूत शुरुआत दी है। लेकिन अगर हमें इस भविष्य का नेतृत्व करना है, तो निर्माण, इनोवेशन और स्केलिंग में बेमिसाल तेजी लानी होगी। चीन पर निर्भरता घटाना, वैश्विक साझेदार बनाना और मजबूत EV इकोसिस्टम बनाना अब हमारी नीति नहीं, हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकता बननी चाहिए।

 

EV की राह लंबी है, लेकिन इंजन स्टार्ट हो चुका है। अब सिर्फ एक्सेलरेटर दबाना है।

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