

आज का दिन वाकई ऐतिहासिक है। डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा ऐलान किया है जो पूरे वैश्विक ट्रेड सिस्टम को हिला सकता है। उन्होंने अनाउंस किया है रेसिप्रोकल टेरिफ सिस्टम, यानी जो देश अमेरिका पर जितना टेरिफ लगाता है, अमेरिका अब उसका आधा या उससे अधिक टेरिफ उन्हीं देशों पर लगाएगा।
रेसिप्रोकल का मतलब है "जैसे को तैसा"। अगर भारत अमेरिका से आने वाले सामान पर 52% टेरिफ लगाता है, तो अमेरिका भारत से आने वाले सामान पर अब 26% टेरिफ लगाएगा। इसी तरह:
चीन: 67% → अमेरिका लगाएगा 34%
EU: 39% → अमेरिका लगाएगा 20%
पाकिस्तान: 58% → अमेरिका लगाएगा 29%
भारत: 52% → अमेरिका लगाएगा 26%
ट्रंप ने यह कदम अपनी America First नीति के तहत उठाया है ताकि अमेरिकी इंडस्ट्री, मैन्युफैक्चरिंग और नौकरियों की रक्षा की जा सके।
प्रतिपक्षी टैरिफ – ट्रंप की नई व्यापार नीति का विश्लेषण
बेसलाइन टेरिफ: हर प्रोडक्ट पर कम से कम 10% टेरिफ लगेगा।
ऑटो इंडस्ट्री: कार, बाइक जैसे वाहनों पर न्यूनतम 25% टेरिफ।
कंट्री-स्पेसिफिक टेरिफ: अलग-अलग देशों पर अलग-अलग दरें।
हालांकि भारत ने हाल ही में कई गुड्स पर टेरिफ कम किया है, फिर भी ट्रंप का कहना है कि भारत 52% टेरिफ लगाता है। इस आधार पर 26% का अमेरिकी टेरिफ भारत से जाने वाले प्रोडक्ट्स पर लागू होगा। इससे निम्नलिखित सेक्टर्स सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं:
एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री
टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स
कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स (स्टील, एल्युमिनियम)
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव – यूएस टैरिफ से प्रभावित भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्र
EU: रिटेलिएशन की धमकी, WTO नियमों के उल्लंघन का आरोप
UK: लॉन्ग टर्म इकोनॉमिक इम्पैक्ट की चेतावनी
ऑस्ट्रेलिया: इसे "अनफ्रेंडली" और "इलॉजिकल" बताया
भारत: अब तक कोई आधिकारिक रिएक्शन नहीं, लेकिन जवाबी टेरिफ संभव
पाकिस्तान के निर्यात पर असर – अमेरिकी टैरिफ का पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
ट्रंप की नीति से अमेरिकी इकोनॉमी को सीधे दो बड़े झटके लग सकते हैं:
इंफ्लेशन: कीमतें बढ़ेंगी — खासकर कार, टेक्नोलॉजी, फूड और कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स में
रिसेशन का खतरा: Goldman Sachs के मुताबिक अमेरिका में रिसेशन की संभावना 35% तक बढ़ गई है
वैश्विक मंदी की आशंका – अमेरिकी व्यापार नीतियों के कारण मंदी की संभावना
अमेरिका का एक्सपोर्ट 56% तक गिर सकता है
अमेरिका का इंपोर्ट 38% तक कम हो सकता है
ग्लोबल इकॉनमी को कुल $1.4 ट्रिलियन का नुकसान संभव
“This is Liberation Day for American Industry. We will no longer tolerate economic abuse.”
डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम न केवल अमेरिका की इकोनॉमिक पॉलिसी को बल्कि पूरे वर्ल्ड ट्रेड सिस्टम को रीसेट कर सकता है। भारत सहित हर देश को अब smart trade diplomacy और balanced retaliation के लिए तैयार रहना होगा।
9 अप्रैल 2025 से यह टेरिफ सिस्टम लागू हो जाएगा। अब देखना यह है कि ग्लोबल इकोनॉमी किस दिशा में जाती है—संतुलन या संघर्ष?
क्या भारत को जवाबी टेरिफ लगाना चाहिए?
क्या ये कदम अमेरिका को बचाएगा या बर्बाद करेगा?
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